दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश का कानून इतना घटिया है के देश को आंतरिक सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं निभाता.। जिस आतंकी देशद्रोही को अविलंब मौत के घाट उतार देना चाहिए उसकी जमानत की अर्जियों पर बहस की जा रही है। ऐसा कानून देश की सुरक्षा क्या खाक सुनिश्चित करेगा..? असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है, असम और इंडिया कटकर अलग हो जाएं: शरजील इमाम।
किसी के भी जमानत का आधार ये तो नहीं हो सकता ना कि वो कितने साल से जेल में है? ये बयान कितना देशद्रोह से भरा हुआ है, ये सीधे सीधे एक संप्रभु स्टेट के खिलाफ जंग के ऐलान जैसा था…… ऐसे कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आते हैं। अब तक इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो जानी चाहिए थी—फांसी या आजीवन कारावास जैसे दंड पर विचार होना चाहिए था। ज़मानत तो दूर, इस पर बहस तक नहीं होनी चाहिए।

