भारत का संविधान: मसौदा समिति के सभी सदस्य कौन थे, क्या उनका योगदान भुला दिया गया? क्या बाबा साहब को आगे लाकर जातिवाद को वोटबैंक में बदला गया?
1: भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया।
लेकिन क्या आपको पता है कि इसे लिखने वाली Drafting Committee यानी मसौदा समिति में सिर्फ बाबा साहब नहीं थे?
👉 आइए जानें:
– मसौदा समिति के सदस्य कौन थे?
– किसका क्या योगदान था?
– और सिर्फ बाबा साहब को क्यों आगे लाया गया?
2: 📅 मसौदा समिति का गठन:
29 अगस्त 1947 को संविधान सभा द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया था, जिसका काम था – संविधान का प्रारूप तैयार करना।
इस समिति के 7 सदस्य थे:
-डॉ. भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष)
-एन. गोपालस्वामी आयंगर
-अलादि कृष्णस्वामी अय्यर
-के.एम. मुंशी
-सैयद मोहम्मद सादुल्ला
-बी.एल. मित्तल (बाद में हटे)
-डी.पी. खेतान (बाद में मृत्यु हुई)
✳ टी.टी. कृष्णमाचारी को बाद में जोड़ा गया।
3: 🧠 अब जानिए हर सदस्य की भूमिका और योगदान:
📌 1. डॉ. भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष)
– समिति का नेतृत्व किया
– प्रारूप को अंतिम रूप देने में केंद्रीय भूमिका निभाई
– ब्रिटिश संविधान, अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स, और भारतीय विधियों का अध्ययन कर उसे मिलाया
– कानूनी भाषा में महान योगदान
लेकिन उन्होंने स्वयं कहा था:
“मैं संविधान का शिल्पी हूँ, निर्माता नहीं।”
📌 2. के.एम. मुंशी
– भारतीय संस्कृति के प्रबल पक्षधर
– मौलिक अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों की अवधारणा के प्रस्तावक
– धारा 44 (समान नागरिक संहिता) के पीछे उनका दृष्टिकोण था
– हिंदी को राजभाषा बनाने के समर्थक
📌 3. अलादि कृष्णस्वामी अय्यर
– मद्रास हाईकोर्ट के प्रतिष्ठित वकील
– कानून व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता पर उनका दृष्टिकोण संविधान में झलका
– "Fundamental Rights" पर इनकी गहरी पकड़ थी
📌 4. एन. गोपालस्वामी आयंगर
– नेहरू के निकट सहयोगी
– जम्मू-कश्मीर राज्य से जुड़े विशेष प्रावधानों (अनुच्छेद 370) की प्रारंभिक रूपरेखा में उनकी भूमिका थी
– कार्यपालिका और विधायिका के संबंधों पर इनकी समझ महत्वपूर्ण थी
📌 5. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
– असम के पूर्व मुख्यमंत्री
– अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर योगदान
– भूमि सुधार पर उनके सुझावों का समावेश
📌 6. बी.एल. मित्तल और डी.पी. खेतान
– स्वास्थ्य और निजी कारणों से समिति से बाहर हुए
– फिर उनकी जगह टी.टी. कृष्णमाचारी को शामिल किया गया
📌 7. टी.टी. कृष्णमाचारी
– वित्त और प्रशासनिक ढांचे में योगदान
– कई बार उन्होंने संसद में अंबेडकर की अनुपस्थिति में मसौदे का पक्ष रखा
4: 🤔 अब सवाल उठता है:
जब इतने विविध और विद्वान लोग इस समिति में थे, तो फिर सिर्फ बाबा साहब को ही "Father of Indian Constitution" क्यों कहा गया?क्या यह ऐतिहासिक सत्य है या राजनीतिक रणनीति?
5:🧩 राजनीति की परतें खोलते हैं:
– 1930s–40s के दशक में बाबा साहब कांग्रेस के कट्टर आलोचक थे
– गांधी से पूना पैक्ट (1932) में वैचारिक टकराव हुआ
– कांग्रेस हमेशा से उन्हें अपने पाले में नहीं देखती थी
फिर भी 1947 में उन्हें मसौदा समिति का अध्यक्ष क्यों बनाया गया?
👉 उत्तर: राजनीतिक विवेक।
6: 🔍 कांग्रेस जानती थी कि स्वतंत्र भारत में जातिगत विभाजन सबसे बड़ा वोटबैंक बनेगा।
इसलिए बाबा साहब को एक "दलित प्रतिनिधि" के रूप में स्थापित करना उनके लिए उपयोगी था।
– इससे दलितों में कांग्रेस के प्रति झुकाव आएगा
– बाबा साहब का "iconification" वोटबैंक निर्माण में मदद करेगा
7: 📢 इसके बाद शुरू हुआ "Selective Glorification" का दौर।
– मसौदा समिति के बाकी सदस्यों को भुला दिया गया
– केवल एक व्यक्ति को “संविधान निर्माता” घोषित किया गया
– पाठ्यपुस्तकों में अन्य योगदान पूरी तरह से गायब कर दिए गए
👉 क्या ये सिर्फ इतिहास की चूक थी या सोची-समझी रणनीति?
8: 📚 बाबा साहब को सम्मान मिलना चाहिए —
लेकिन क्या उनकी वैचारिक ईमानदारी को कांग्रेस ने अपनाया?
– बाबा साहब हिंदू कोड बिल के समर्थन में थे
– समान नागरिक संहिता के प्रबल पक्षधर थे
– जातिगत आरक्षण को समय-सीमित समाधान मानते थे
लेकिन कांग्रेस ने इन्हीं विचारों को दरकिनार कर सिर्फ उनका राजनीतिक ब्रांडिंग किया।
9: ⚖️ संविधान का निर्माण सामूहिक प्रयास था।
लेकिन इतिहास को एक व्यक्ति-केंद्रित बनाकर
– भारत की जनता को टुकड़ों में बाँटने का बीज बोया गया
– और इसका प्रयोग जातिगत वोटबैंक के रूप में हुआ
10: 📌 निष्कर्ष:
– बाबा साहब का योगदान महान है, लेकिन एकमात्र नहीं
– संविधान में भारतीय परंपरा, संस्कृति, न्याय व्यवस्था, और संतुलन – सबका योगदान है
– कांग्रेस ने इस सामूहिक योगदान को छिपाकर राजनीतिक जातिवाद को जन्म दिया
📢 अब समय है कि हम अपने संविधान और उसके रचनाकारों को सही संदर्भ में जानें और पढ़ें।
11: 📚 सच्चाई के कुछ स्रोत जो आप खुद पढ़ सकते हैं:
– Constituent Assembly Debates (Vol I-XII)
– K.M. Munshi’s Speeches & Writings
– Granville Austin – The Indian Constitution: Cornerstone of a Nation
– Durga Das – India From Curzon to Nehru and After
– संविधान सभा की ऑफिशियल कार्यवाही|

