हमे सबसे बड़ा झूठ यह पढ़ाया गया कि भारत कृषि प्रधान देश है और भारत के लोग केवल कृषि पर निर्भर थे, जबकि वास्तविकता यह ही कि भारत तकनीकी क्षेत्र में भी सबसे आगे था.
दुनिया का 70% हिस्सा भारत के बनाए हुए कपडे़ पर निर्भर था. भारत के लगभग हर गांव में अनेकों प्रकार के व्यवसायिक (गैर कृषिकार्य) हुआ करते थे.
हर इलाके को उसके उद्योग की विशेषता के आधार पर जाना जाता था. कहीं पत्थर पर कारीगरी होती थी, कहीं सोने के आभूषण बनते थे, कहीं हथियार बनते थे कहीं संगीत यंत्र बनते थे.
किसी इलाके की पहेचान वहां के विशेष प्रकार के कपड़े से थी, तो किसी इलाके की पहेचान वहां के विशेष व्यंजन थे. नाव और जहाज भी भारत में बनते थे और विदेशों में जाते थे.
भवन निर्माण की सबसे उन्नत तकनीक हमारे ही पास थी. दुनिया में कहीं भी भारत से ज्यादा प्राचीन भवन, मंदिर, मीनारें, किले, आदि नहीं मिलेंगे. ऐसे भव्य भवन है जिनको आज भी बनाना मुश्किल लगता है.
कला, साहित्य, चिकित्सा, आदि में भी भारत सबसे आगे था. सबसे बड़ी बात ये कि हर एक गांव में हर एक काम करने वाले लोग मिल जाते थे. अंग्रेजों ने भारतीय उद्योग को तबाह कर दिया.
भारतीय उद्योग, गुरुकुल, आयुर्वेद, मूर्तिकला, भवन निर्माण, साहित्य, दस्तकारी, आदि को अंग्रेजों ने खत्म कर दिया. आज के तथाकथित ओबीसी ज्यादातर इन कार्यों को करते थे. वो बेरोजगार हो गए.

