चतुर्दशी, 20 मार्च 23

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 गीता वीडियो एवम पंचांग 

गीता अध्याय 02 (सांख्ययोग) श्लोक 05



आज का पंचांग

सोमवार, १२००३/२०२३, 

चैत्र, कृष्ण १४, युगाब्ध - ५१२४

🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०७९

⛅ 🚩तिथि - चतुर्दशी रात्रि 01:47 तक तत्पश्चात अमावस्या

⛅दिनांक - 20 मार्च 2023

⛅दिन - सोमवार

*⛅शक संवत् - 1944*

*⛅अयन - उत्तरायण*

*⛅ऋतु - वसंत*

*⛅मास - चैत्र*

*⛅पक्ष - कृष्ण*

*⛅नक्षत्र - शतभिषा रात्रि 07:39 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*

*⛅योग - साध्य शाम 04:21 तक तत्पश्चात शुभ*

*⛅राहु काल - सुबह 08:15 से 09:46 तक*

*⛅सूर्योदय - 06:44*

*⛅सूर्यास्त - 06:50*

*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*

*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:09 से 05:57 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:23 से 01:11 तक*

*⛅व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि*

*⛅विशेष - चतुर्दशी के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*


*🌹 मासिक शिवरात्रि : 20 मार्च 2023*🌹


*🌹कर्ज मुक्ति हेतु -*


*🌹 हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते-करते ये 17 मंत्र बोलें ! जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोलें ! इससे कर्जे से मुक्ति मिलेगी ।*


🌹1) *ॐ शिवाय नमः* 

🌹2) *ॐ सर्वात्मने नमः*

🌹3) *ॐ त्रिनेत्राय नमः*    

🌹4) *ॐ हराय नमः*

🌹5) *ॐ इन्द्रमुखाय नमः*  

🌹6) *ॐ श्रीकंठाय नमः*

🌹7) *ॐ सद्योजाताय नमः* 

🌹8) *ॐ वामदेवाय नमः*

🌹9) *ॐ अघोरहृदयाय नम:* 

🌹10) *ॐ तत्पुरुषाय नमः*

🌹11) *ॐ ईशानाय नमः*     

🌹12) *ॐ अनंतधर्माय नमः*

🌹13) *ॐ ज्ञानभूताय नमः* 

🌹14) *ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः*

🌹15) *ॐ प्रधानाय नमः*   

🌹16) *ॐ व्योमात्मने नमः* 

🌹17) *ॐ व्यूक्तकेशात्मरूपाय नम:*


*🔹अमावस्या - 21 मार्च 2023🔹*


*🔸20 मार्च रात्रि 01:47 से 21 मार्च रात्रि 10:52 तक ।*


*🔹नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए🔹*


*🔹घर में हर अमावस्या अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*

  

*🔹आरोग्यप्रदायक - सूर्य मन्त्र🔹*


*ॐ नमोऽस्तु दिवाकराय अग्नि तत्वप्रवर्धकाय शमय शमय शोषय शोषय अग्नितत्वं समतां कुरु कुरु ॐ ।*


*🔸गर्मी से उत्पन्न शारीरिक रोग, बुद्धि की विकलता ( उन्माद, पागलपन ) अथवा दुर्बलता, दृष्टि-रोग, अग्नि- तत्व की बिषमता, शरीर में जलन आदि हो तो इनके निवारण के लिए सूर्य मन्त्र हैं । किसी भी अमावस्या को 40 बार जप करने से यह मन्त्र सिद्ध हो जाता हैं।



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