हिंदू दलित की ह/त्य@ में अब्दुल सद्दाम थे शामिल इसलिए बार-बार बुलाने पर भी नही गया चंद्रशेखर रावण ?? ये वही रावण है जो हर छोटी छोटी बात पर भीड़ जमाकर कही भी पहुंच जाता है बस मामले में सामने वाला पक्ष सवर्ण हिंदू होना चाहिए , लेकिन मुस्लिम यदि हुआ तो रावण किसी बिल में छुपा मिलेगा
अनेकों ऐसे मामले देखे जा चुके है, सबकुछ साफ है के कथित दलित हित चिंतक किसी दलित के लिए नहीं अपितु एक एजेंडे के लिए कार्य करते है। इन लोगों के लिए हमारे दलित बंधु केवल एक मोहरा है और दुर्भाग्य है के दलित बंधुओं को ये सत्य आज भी दिखाई नहीं दे रहा
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