हिंदुओं को कहा गया कि धर्म तो अन्धविश्वास है, तुम साइंस पर भरोसा करो और सेकुलर रहो। ये ज्ञान मुझे स्कूल और कॉलेज के फिजाओं में बचपन से हीं घुला हुआ दिखा है। इसका कारण है, अंग्रेजों के बनाए एजुकेशन सिस्टम में हिंदुओं का विज्ञान के नाम पर, सेकुलर नसबंदी किए जाने का पुराना इतिहास। अंग्रेज चले गए मगर पीढ़ी दर पीढ़ी ये विष बच्चों को चटाया जाता रहा।
आज विज्ञान में सबसे आगे रहने वाला देश अमेरिका भारत के FCRA कानून में संशोधन को लेकर धमकी दिया है कि अगर आपने ऐसा किया, तो अमेरिका के साथ आपके संबंध प्रभावित होंगे। मतलब, हमें विज्ञान के नाम पर अधर्मी बनाने वाले लोग; खुद ईसाई धर्म के इतने गहरे भक्त हैं कि भारत में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन न रुके इसके लिए राष्ट्रीय संबंध बिगाड़ने तक की धमकी दे डाले ?
अमेरिका हर साल बीस हजार करोड़ से भी अधिक पैसे भारत भेजता है। इसमें तकरीबन चार हजार करोड़ चर्च और मिशनरियों को जाता है। कुछ समाज सेवा के अलावा इन पैसों का इस्तेमाल हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाने में किया जाता है। मुख्यतः दलित और आदिवासियों को ब्राह्मणों के खिलाप भड़का कर पैसों से मदद करके उन्हें ईसाई बनाया जाता है। चीन और पाकिस्तान में ये एक फूटी कौड़ी से भी समाज सेवा नहीं करते, क्योंकि धर्म परिवर्तन करवाना वहां सम्भव नहीं है। भारत में हिन्दू स्वयं अपने धर्म को गालियां देते हैं, इनका तो आधी कौड़ी दे कर भी धर्म बदला जा सकता है। और इसीलिए ये भारी रकम अमेरिका द्वारा भारत में भेजा जाता है।
भारत में आज जितना भी जातीय आग आप देख रहे हो, उनमें अधिकांश ईसाईयों द्वारा लगाई गई आग है। दक्षिण भारत में द्रविड मूवमेंट ईसाई द्वारा हीं शुरू करवाया गया था। इसमें ब्राह्मणों का वहां से लगभग सफाया करवा दिया गया। ब्राह्मण के रास्ते से हटने के बाद, बाकी हिंदुओं को ईसाई और इस्लाम धर्म में बदला जा रहा है।
इसीलिए हिंदुओं; विज्ञान का चूरन चाट कर अपने धर्म पर सवाल उठाना बंद करो। जहां सनातन धर्म हजारों साल पहले धरती को गोल समझते हुए ज्योग्राफी को 'भूगोल' कहा; वहीं ईसाई और इस्लाम धर्म आज तक धरती को चपटी कहते आ रहे हैं। और फिर भी धर्म में विश्वास नहीं छोड़ते। आप तो विकसित संस्कृति वाले सनातन धर्म में पैदा हुए हो। भला आपको अपने धर्म पर सवाल उठाने की क्या जरूरत ?

