दिल्ली के जंतर-मंतर पर भले ही तिलचट्टों का आन्दोलन खत्म हो गया हो,आंदोलन क्या कहें उसे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित मंच भले ही उठ गया हो।लेकिन इस तस्वीर में नजर आ रही हर महिला का चेहरा और इनके द्वारा बोली गई हर बात को याद रखा जाएगा।इनके मां बाप के संस्कारों की इनकी शिक्षा के स्तर को इनकी बोली को याद रखा जाएगा।किस तरह से देश के प्रधानमंत्री को गालियां दी गई वो भी उस प्रधानमंत्री को जो 18 घंटे बिना रुके पूरा दिन काम करता है देश की प्रगति के लिए देश के भविष्य के लिए।
इन कॉकरोचों को तो दिन में चार बार पेट भरने के लिए जुनेद खाना परोस रहा था।विदेशों में बैठे आका ऑनलाइन ऑर्डर करके 17 प्रकार का भोजन भेज रहे थे।
वो 75 साल की उम्र पार कर चुका व्यक्ति तो 2 बार खाना खाता है वो सादा भोजन फिर भी उस व्यक्ति को इतनी गाली।
देख कर शर्म भी आई,आंसू भी आए,तरस भी आया भले ही उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री ना मानते लेकिन बुजुर्ग तो मानते उसे।लेकिन इस प्रोटेस्ट ने भारत में छुपी हुई नीचता बाहर ला दी।इन सभी को देख कर और इनकी बातों को याद कर के सिर्फ एक बात ही कहना चाहूंगा तुम्हारा सभी का जीवन नर्क से ज्यादा खराब हो।
तुम्हें लगता है कि कुछ घंटे सड़क पर खड़े हो कर दो चार नारे लगा कर,एक दो पत्थर फेंक कर,पुलिस से आंख मिला कर तुम क्रांतिकारी बन गए?यही तो सबसे बड़ा भ्रम है।कुछ मिनट का थ्रिल,कुछ वायरल रीलें,कुछ हजार लाइक्स,कुछ लोगों की वाहवाही और फिर?फिर नेता अपनी गाड़ी में बैठ कर निकल जाएगा।शाम को किसी टीवी डिबेट में बैठकर भाषण देगा, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाल देगा कि हम अपने युवाओं के साथ हैं।बस... कहानी यहीं खत्म।
लेकिन तुम्हारी कहानी वहीं से शुरू होगी।किसी थाने की एक फाइल में तुम्हारा नाम लिखा जाएगा।फिर कोर्ट,फिर तारीख, फिर वकील और उसकी फीस।और सबसे मुख्य बात पता है क्या होगी?कोर्ट में हर तारीख पर तुम्हारे साथ कोई नेता नहीं होगा।वहान होंगे तुम्हारे मजबूर मां बाप।जिन बेचारों ने शायद जिंदगी में कभी थाने का दरवाजा तक नहीं देखा होगा,वो कचहरी की लाइन में खड़े होंगे।तुम्हारा मजबूर बाप ऑफिस से छुट्टी लेकर आएगा और वकील की फीस भरेगा।वो लोगों के ताने सुनेगा और घर लौट कर तुम्हारी मां से झूठ बोलेगा कि सब ठीक हो जाएगा।जबकि अंदर ही अंदर उसे भी नहीं पता होगा कि आगे क्या होने वाला है?
और जिन नेताओं ने कहा था हम लीगल हेल्प देंगे,बिल्कुल देंगे वो लीगल हेल्प देंगे अपने कार्यकर्ताओं को जो छात्र भेष में तुम्हारे साथ खड़ा हुआ दंगे कर रहा है और तुम्हे उकसा रहा है।
तुम्हे भी देंगे,तुम्हे देंगे वो किसी वकील का नंबर या ज्यादा हुआ तो आमने सामने मिलवा देंगे।उसके बाद तुम,तुम्हारा परिवार और तुम्हारी किस्मत।
मेरे बच्चों आज जिस हाथ में पत्थर है,कल उसी हाथ में तुम्हें ऑफर लेटर पकड़ना है।आज जिस गले से नारे निकल रहे हैं,कल उसी गले से इंटरव्यू में अपना परिचय देना होगा।आज जिस चेहरे पर गुस्सा दिख रहा है,कल उसी चेहरे की बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होगी।याद रखना दुनिया बदल गई है।कैमरे सिर्फ सड़कों पर नहीं हैं,हर मोबाइल में है और मोबाइल हर हाथ में है।तुम्हे लगता है कि मोबाइल तुम्हारे इशारों पर काम करता है, नहीं!शोना बाबू नहीं!वो सब कुछ देख रहा है सब कुछ सुन रहा है बाकी वीडियो बनाते हो फोटो खींचते हो ये सोच कर कि बाद में डिलीट कर देंगे।न मेरे शोना ना वो डिलीट करने के बाद भी डिलीट नही होती है।डिजिटल रिकॉर्ड मिटते नहीं,घूमते रहते हैं।और अगर किसी गंभीर मामले में नाम आ गया जो आना पक्का है तो उसका असर सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रहेगा।हो सकता है प्राइवेट कंपनी में चपरासी की नौकरी के भी लाले पड़ जाएं।
यू एस पू एस यूरोप शुरोप को तो भूल ही जाना।नौकरी देते समय कोई HR यह नहीं पूछता कि तुम किस विचारधारा के थे।वो सिर्फ यह देखेगा कि तुम्हारा बैकग्राउंड क्या कहता है।
एक छोटी सी गलती सालों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
रुझान आ भी रहें हैं जहां अब बच्चे रो रहें हैं कि पुलिस डिटेन कर रही है।यही होना भी था।कोई सरप्राइजिंग नहीं है।
एक बात और...
नेता बदलते रहेंगे,मुद्दे बदलते रहेंगे,हैशटैग बदलते रहेंगे,लेकिन अगर एक बार तुम्हारा भविष्य बिगड़ गया तो उसे ठीक करने कोई नेता नहीं आएगा।इसलिए मेरे प्यारे Gen Z याद रखना
पत्थर उठाने में पांच सेकंड लगते हैं लेकिन उस पत्थर की कीमत चुकाने में कभी कभी तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की पूरी जिंदगी निकल जाती है।
दुर्भाग्य से यह देश का पहला ऐसा आंदोलन हुआ जिससे अधिकांश भारतीय समाज इसके तौर-तरीकों से खुश नहीं थे। जिस कारण इसे समाज का नैतिक एवं सैद्धांतिक समर्थन भी प्राप्त नहीं हो पाया,इसे आंदोलन कहना भी आंदोलन शब्द का अपमान है।
कोई प्रोटेस्ट कितने दिनों का होता है?चंद दिनों का,उसके बाद सबको अपने-अपने वास्तविक जीवन में ही जाना होता है। वास्तविक जीवन में इस प्रोटेस्ट की बातों को लागू करेंगे कोई?
कौन परिवार चाहेगा ऐसी नग्न अवस्था में रहने वाली ‘मेरा लिंग,मेरी Ch**त,मेरी मर्जी’ कहने वाली लड़की को अपने घर की बहु बनाया जाए?जब उन्हें पता चलेगा लड़की JNU से निकली है,कोकरोच प्रोटेस्ट की मेंबर है तपाक से वो कहेंगे नहीं नहीं,यह लड़की नहीं चाहिए।ये बहु बनके हमारे घर आ गई तो नंगेपन का लंगर लगा देगी गली मुहल्ले में।आस पास पड़ोसियों में अश्लीलत का भंडारा लगाके परिवार की वो थू-थू करवाएगी।लोग कहेंगे बहु लाए हो या कोठा सजाने के लिए आइटम?यह तो सास ससुर को ही गंदी गालियां बकेगी।
कौन परिवार चाहेगा उनकी बेटी का रिश्ता किसी JNU, लेफ्टिस्ट स्टूडेंट विंग,योगेंद्र यादव से डिग्री लेके आए किसी लौंडे से हो?लड़की के मां बाप यही सोचेंगे कि यह लड़का पक्का समलैंगिक होगा।चरस गांजा का शौकीन है।नशे के लिए यह अपनी बीवी भी परोस देगा अपने दोस्तों के आगे।ना यह रिश्ता नहीं चाहिए।
किसी ऐसे स्कूली बच्चे का पता चल जाए कि यह भी Gen-जी वाला है तुरंत मां बाप अपने बच्चों को समझाएंगे कल से इस लड़के को नहीं बुलाना है,वरना तू भी गंदी गंदी गालियां सीख जाएगा।बैग में छिपाकर तुझे भी वेप (सिगरेट) पीने की लत लगा देगा ये।
हमने देखा बहुत से पुराने कांग्रेसी परिवार भी जंतर मंतर पर फैली अश्लीलता देख कर दुखी परेशान थे,लेकिन यह इतनी पुरानी पार्टी कांग्रेस की अक्ल को क्या हुआ है?ये तो बिल्कुल ही सभ्य समाज से कट गई है।कांग्रेस आखिर केजरीवाल की पॉलिटिक्स को फॉलो क्यों कर रही है?यह लुच्चेपन की आदत तो केजरीवाल की है।याद करो यह कैसे शीला दीक्षित को गंदी -गंदी गालियां बकता था।राजनीति में सबसे गंदी भाषा केजरीवाल ही बोला करता था।जब ये पहली बार मुख्यमंत्री बन पुलिस वालों को ‘ठुल्ले’ कहता था।इसी ने कहा था गणतंत्र दिवस की परेड नहीं होगी तो क्या सेना मर जाएगी?एनार्की करना केजरीवाल के DNA में है पर कांग्रेस ने क्यों अपनी अक्ल का जनाजा निकलवाया हुआ है?
इस बात को तो सभी नोटिस कर रहें हैं कि जबसे केजरीवाल दिल्ली आया है,पिछले 15 सालों से दिल्ली सबसे ज्यादा गंदी गालियां देना वाला शहर है,यहां हर एक के जुबान पर गाली चढ़ी हुई है।

