इसका अंध समर्थन करने वालों को आप क्या कहेँगे समझदार या गँवार । ये वहीं है जिसे अधिकतर हिन्दू support और follow करते है लेकिन लिखकर ले लीजिये ये व्यक्ति बौद्धिक तरीके से अपने मजहबी एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहा है... ये जो भी बाते बोल रहा है वो बिना तथ्यों के है... यदि सावित्रीबाई और संविधान के पहले किसी महिला को पढ़ने का अधिकार नहीं था तो भारत में इतनी सारी विदुषी महिलाएं क्या आसमान से गिरी थी?
ज्यादा पीछे मत जाइये महिला सशक्ति करण कि साक्षात् मूर्ति, माता अहिल्याबाई होलकर जी को ही जान लीजिये जिन्होंने अपने समय में अनेकों विद्यालय खुलवाए जहाँ लड़के लड़की सबको शिक्षा दी जाती थी. सावधान रहो कालनेमियों से और इस अल्ताफिया वाली मानसिकता से तो जितना हो सके बचकर वरना परिणाम बताने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है क्योंकि पूरा विश्व इस मानसिकता को झेल रहा
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