जर्मनी और ब्रिटेन ने अभी एक फिल्म को प्रवासियों के खिलाफ बताते हुए प्रतिबंध लगाया है, जिसपर एलन मस्क ने पूरी फिल्म "सिटीजन विजिलेंटे" को ही एक्स पर डाल दिया। फिल्म की शुरुआत माइकल सैंडर्स से होती है, जो एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी रह चुका है और अब व्यवसाय में लगा हुआ है, इस दौरान वो अपने शहर में घूम रहा होता है, जहां वो प्रवासी मुस्लिमों को देखता है, वे शहरों में गंदगी फैलाते है, स्थानीय लोगों को घूरते है खासकर महिलाओं को और कई बार बेवजह चिल्लाते है, दुकानों से बिना पैसे दिए समान ले जाते है जब पकड़े जाए तो धमकी देते है
माइकल अनुशासनप्रिय व्यक्ति था, कुछ प्रवासी बस का किराया मांगने पर धमकाने लगे, जिसपर माइकल खुद आगे आकर पैसे देता है और उन्हें समझाता है। बात हद से ज्यादा तब बढ़ गई जब एक चौदह साल की बच्ची को सीरियाई प्रवासियों के समूह ने पकड़ लिया और गैंगरेप कर अधमरी हालात में छोड़ दिया। जब ये मामला अदालत में पहुंचा तो अदालत ने अपराधियों की कम उम्र और शरणार्थी होने की दलील देकर रिहा कर दिया
माइकल समझ जाता है कि कानून व्यवस्था इनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती तब ये पीड़ित के पास पहुंचते है और पूछते है कि "तुम्हे बदला चाहिए"? पीड़िता और उसके मां बाप हाँ कहते है। माइकल सबसे पहले उस भ्रष्ट जज की हत्या कर देता है, जिसने आरोपियों को छोड़ा था। उसने चेहरा ब्लर करके एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उसने बताया कि कानून प्रणाली पीड़ितों को न्याय देने असक्षम हो चुकी है जिस कारण उसे ये करना पड़ रहा है। वो एक हीरो बन जाता है, पर वो गुप्त था, उसे सब विजिलेंटे कहने लगते है
फिल्म के अंत इतना विवादित है कि यूरोपीय देशों ने बैन लगा दिया,वास्तव में माइकल एक बलात्कारी गिरोह के लड़के के घर जाता है और उसे डराकर बाकी सभी उसके दोस्तों को बुलवाता है,,इस दौरान माइकल मुख्य आरोपी के पिता से पूछता है कि क्या आपने यहीं संस्कार दिया है? तो पिता बोलता है कि वो उसे कुरान की शिक्षा देता है और उसके मुख्यभूमि में युद्ध के कारण इसके मन पर दबाव पड़ा है, इसलिए इसे माफ कर देना चाहिए। इसके पश्चात ये आरोपी की बहन के पास जाते है, उसकी बहन उसके कपड़े को लेकर बोलती है, उसने कपड़े ही ऐसे पहने थे
इसके पश्चात वो मुख्य आरोपी से पूछता है, आरोपी बोलता है कि उसे लगा वो लड़की यहीं चाहती है। तब माइकल कहता है कि यूरोप और अमेरिका की महिलाएं इसलिए रेप के लायक है क्योंकि वे अपनी मर्जी के कपड़े पहनती है? तो फिर तुम यहां आए ही क्यों? इसके बाद बंदूक की गड़गड़ाहट शुरू होती है, उसने सब लोगो को गोलियों से भून दिया था
अब आप सोच रहे होंगे कि ये फिल्म प्रोपेगैंडा होगी, बिल्कुल नहीं, ये रियल घटना पर बेस्ड है जो जर्मनी में हुई थी जहां अदालत ने आरोपियों को रिहा कर दिया था, बस राइटर ने फिल्म की कहानी को इसके आगे से लिखना शुरू किया, जो हर व्यक्ति प्रतिक्रिया में करता
यूरोप के देशों ने इसे बैन करके शुतुरमुर्ग के जैसे अपना सर रेत में गाड़ दिया है, क्या ये घटना गलत है? क्या फिल्म ने जो प्रश्न उठाया वो गलत है? अगर गलत है तो फ्रांस क्यों जल रहा है? स्पेन और स्वीडन क्यों जलता रहता है?
अभी कुछ दिन पहले ही लंदन और जर्मनी में प्रवासियों द्वारा बनाए शिकार की घटना घटी है क्या वो भी गलत है?
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