भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) ऑफिसर निशा उरांव ने मिशनरी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।निशा उरांव ने सोशल मीडिया पर अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए कहा है कि जब मिशनरी स्कूलों में गैर-इसाई बच्चों के लिए इसाई प्रार्थनाएं अनिवार्य की जाती हैं, तब कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन सनातन संस्कृति के मंत्रोच्चार पर तुरंत विवाद खड़ा कर दिया जाता है।
वास्तव में भारत में बहुत अधिक दोगलापन है, सेक्युलरिज्म के नाम पर केवल हिंदुओं को दबाया जाता है लेकिन अन्य मजहब पंत को कुछ भी करने की पूरी आजादी होती है। हर हिंदू नेता, हिंदू अधिकारी को देश में समानता के लिए निशा जी की ही तरह आवाज उठानी चाहिए , ये धर्मसंगत भी है और संविधान सम्मत भी

