जब नर्मदा नदी में 11000 लीटर दूध अर्पित किया गया तो बहुत लोगों को समस्या हुई बहुत बड़े-बड़े बुद्धिजीवी अपने आप को महा ज्ञानी और दूध बहाने वालों को बेवकूफ तथा और अंध श्रद्धा रखने वाला सिद्ध करने में जुट गए लेकिन जब ईद पर अनगिनत बेजुबान जानवरों का खून बहाया गया, सड़कों को नदी नालों को लाल किया गया तब उनके मुंह में दही जम गया और यही है इन दोगले कथित बुद्धिजीवियों की गंदी सच्चाई।
वैसे पूरा दोष इन दोगले बुद्धिजीवियों का नहीं बल्कि इन्हें फोलो करने वाले सेकुलर धूर्त लोगों का भी है जो खुद भी उनकी ही जैसी सोच वाले होते हैं उन्हें भी लाल हुई सड़कों से कभी दिक्कत नहीं होती। आपको कोई नर्मदा नदी में बहता दूध दिखाकर अंध श्रद्धा वाला बताने का प्रयास करें तो उन्हें नदी नालियों में बहता हुआ खून दिखा दीजिए यही उनके लिए सही जवाब होगा

