राजस्थान में जून का महीना भयंकर गर्मी वाला होता है। इस माह में राजस्थान से बाहर के निवासियों के लिए आना मुश्किल ही होता है। ऐसे ही 1576 में जून माह में 18 तारीख को राजस्थान ही नहीं पूरे भारत का एक ऐसा युद्ध लड़ा हुआ जो इतिहास की तारीखों में दर्ज है। वैसे तो इससे भी भीषण दिवेर जैसा युद्ध 1582 में हुआ लेकिन यह युद्ध निर्णायक युद्ध माना गया, ये युद्ध था हल्दीघाटी का युद्ध।
मेवाड़ में हल्दी जैसी मिट्टी और अरावली की दुर्गम पहाडियों के बीच दिल्ली से आई अकबर की मुगल सेना ने महाराणा प्रताप से युद्ध किया। यह युद्ध भी सामान्य युद्ध नहीं होकर असाधारण युद्ध था। महाराणा प्रताप की सेना ने दुर्गम पहाडियों में अकबर की सेना के छक्के छुड़ा दिए। एक ओर अनजान रास्तों पर आई मुगल सेना तो दूसरी ओर प्रताप की सेना में जंगलों में जीवनयापन करने वाली भील आदिवासी जनजाति के तीर बाण वाले योद्धा ; वो भी पेडों पर बैठे बैठे गुरिल्ला व छापामार पद्धति से लड़ना। चारो ओर से गिरी अकबर की सेना को भागने के लिए भी जगह मिलना मुश्किल हो गई।
अकबर युद्ध से पहले चार बार अलग अलग सेनापतियों के माध्यम से महाराणा प्रताप को अधीनता स्वीकार करने के लिए कहा गया। लेकिन शरीर पर 80 घाव लगने पर भी युद्ध करने वाले महाराणा सांगा के पौत्र कैसे इस अधीनता को स्वीकार कर लेते। अपने आपको एकलिंगनाथ जी के दीवान मानने वाले किस मुहँ से उनके सामने जाते !
यह युद्ध था स्वाभिमान और मेवाड़ के अक्षुण्ण गौरवशाली परम्परा को निरंतर बनाए रखने का, फिर प्रताप जैसे शूरवीर कैसे पीछे हट जाते। उनकी ताकत थी वनों में रहने वाली उनकी लड़ाकू टीम जो हल्दीघाटी के जर्रे जर्रे से परिचित थी। युद्ध हुआ और जबरदस्त हुआ। महाराणा प्रताप ने अकबर की सेना को धूल चटाई।
युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए झाला बीदा जिन्होनें महाराणा को सुरक्षित निकाला और चेतक ने अपनी जान की बाजी लगा दी लेकिन अपने स्वामी की रक्षा की। अकबर ने सेना को आदेश दिया था कि प्रताप को जीवित पकड़ा जाय लेकिन उल्टे दिल्ली से आई मुगल थककर चूर चूर होकर पीछे हटती गई। पहाड़ों से बरसते तीरों ने उनके मंसूबों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। युद्ध से अकबर की सेना इतनी विचलित हुई कि अगली बार युद्ध के लिए आने में बहुत समय लगा।
धन्य है प्रात: स्मरणीय महाराणा प्रताप जिन्होनें माटी की रक्षा के लिए जीवन समर्पित कर दिया, आन बान शान की रक्षा की। आज भी विदेशों से आने वाले पर्यटक हल्दीघाटी की मिट्टी लेने आते है और पूजा करते है। ऐसी है हल्दीघाटी....!!!
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