सार्वजनिक ज़मीन पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं": इलाहाबाद HC। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़ने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी भूमि का उपयोग किसी एक पक्ष द्वारा धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने संभल जिले में गुन्नौर तहसील अंतर्गत इकौना निवासी असीन की याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार होता है, इसका एकतरफा उपयोग कानूनन स्वीकार्य नहीं है। अब भी यदि लोग सार्वजनिक स्थलों पर नमाज करते हैं तो समझ लो कि यह बताना चाह रहे हैं कि हमारे लिए हमारे मजहब से बढ़कर ना इस देश का कानून है,ना संविधान है, ना कोई कोर्ट है, न प्रशासन है। ऐसे में कानून को चाहिए कि वह इन्हें उचित पाठ पढ़ाया और समझाएं कि भारत में रहना है तो संविधान और कानून का सम्मान करना ही होगा। याद रहे लातों के भूत बातों से कभी नहीं मानते

