TCS, TiSs , लेंसकार्ट, indigo ना जाने इस लिस्ट में कितने बड़े कॉर्पोरेट घराने होंगे जिन्होंने हिंदू संस्कृति को नष्ट करने की कसम खाई हुई है, लेकिन यहां गौर करने वाली बात ये है के ना जाने कितने निर्लज और लालची हिंदू हैं जो अपने धर्म का सीक्रिफाईज कर रहे हैं नौकरियों के लिए और इसका कारण क्या है?
हिंदू और हिंदू धर्म के साथ जो भी गलत हो रहा है उसका मुख्य कारण खुद हिंदू है। यदि हिंदू अपने धर्म को समझें उसका सम्मान करें, हिंदुओं को उचित धर्म ज्ञान और संस्कार दिए जाए तो क्या ये कॉरपोरेट्स हिंदू धर्म के साथ ऐसा कर सकेंगे? हिंदू संगठनों को सबकुछ छोड़कर सबसे पहले विचार करना चाहिए कि कैसे सरकार की बुद्धि ठिकाने लाकर देश में सही शिक्षा पद्धति लागू कर शिक्षा का स्तर सुधारा जाए और हर हिंदू के लिए हिंदू शास्त्रों का ज्ञान अनिवार्य किया जाए ताकि वो किसी प्रकार के धर्म विरोधी षड्यंत्र के कभी शिकार न हों।
चश्मा बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट के बाद अब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) एक बड़े धार्मिक विवाद में फँस गई है। सोशल मीडिया पर इंडिगो के कुछ कथित नियम (ग्रूमिंग गाइड) वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने कर्मचारियों के तिलक लगाने, कलावा बाँधने और बिंदी-सिंदूर लगाने पर पाबंदी लगा दी है। इन दावों के सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और इंडिगो को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा विवाद और वायरल दस्तावेज?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक्स (X) पर कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए गए। दावा किया जा रहा है कि ये इंडिगो की ग्रूमिंग हैंडबुक के पन्ने हैं। ‘Male Poise’ और ‘Female Poise’ नाम के इन दस्तावेजों में लिखा है कि ड्यूटी के दौरान तिलक, सिंदूर, मंगलसूत्र और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक नहीं पहने जा सकते। सोशल मीडिया यूजर्स का आरोप है कि जहाँ हिंदू प्रतीकों पर रोक की बात कही गई है, वहीं हिजाब जैसे अन्य प्रतीकों को लेकर नियम नरम हैं। लोग इसे ‘धार्मिक भेदभाव’ बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर उठी बॉयकॉट की मांग
जैसे ही ये नियम वायरल हुए, इंडिगो के खिलाफ ‘बॉयकॉट’ का ट्रेंड शुरू हो गया। लोग एयरलाइन को चेतावनी दे रहे हैं कि उन्हें जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। कुछ यूजर्स ने जेट एयरवेज का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कंपनियाँ ग्राहकों की संस्कृति का सम्मान नहीं करतीं, उनका बुरा हाल होता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या हिंदू संस्कृति का पालन करना अब कॉर्पोरेट जगत में अपराध बन गया है? कई लोग माँग कर रहे हैं कि सरकार को निजी कंपनियों के लिए ऐसे नियम बनाने चाहिए ताकि किसी भी धर्म के साथ भेदभाव न हो।
एक यूजर ने लिखा, “क्या ये सभी कॉर्पोरेट्स जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हैं, या फिर हिंदू संस्कृति का मजाक उड़ाना कोई नया फैशन बन गया है?”

इसके अलावा, एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि कार्पोरेट सेक्टर हिंदूओं के खिलाफ हो रहा है और इस पर एक्शन जरुरी है।

कई लोगों ने तुरंत इन नियमों को वापस लेने की माँग की, जबकि कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सरकार को अब कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए धार्मिक अभिव्यक्ति को लेकर स्पष्ट और समान दिशा-निर्देश बनाने चाहिए, ताकि ऐसी स्थितियाँ बार-बार न बनें।
लेंसकार्ट विवाद क्या था?
यह मामला ठीक वैसा ही है जैसा कुछ दिन पहले लेंसकार्ट के साथ हुआ था। लेंसकार्ट के स्टोर गाइड में भी बिंदी, तिलक और कलावा को मना किया गया था, जबकि हिजाब की अनुमति थी। उस समय भी देशभर में भारी प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद कंपनी के मालिक पीयुष बंसल को माफी माँगनी पड़ी थी। अब इंडिगो के मामले में भी लोग वैसी ही माफी और नियमों में बदलाव की माँग कर रहे हैं। फिलहाल इंडिगो की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान आना बाकी है।

