झूठ फैलाकर समाज में वैमनस्यता का जहर घोलने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान होना ही चाहिए...👌🏻👍🏻भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25(2)(ख) (Explanation II) के अनुसार, हिंदू धर्म में सिख, जैन और बौद्ध धर्म मानने वाले व्यक्ति शामिल माने जाते हैं। यह प्रावधान विशेष रूप से सामाजिक सुधार और हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के संदर्भ में इन समुदायों को कानूनी रूप से "हिंदू" की व्यापक परिभाषा के अंतर्गत लाता है।
मुख्य बिंदु:
कानूनी परिभाषा: संविधान article 25 (2)(b) के अनुसार, "हिंदुओं" के संदर्भ में सिखों, जैनियों या बौद्धों का संदर्भ भी शामिल है।
उद्देश्य: यह मुख्य रूप से हिंदू धार्मिक स्थलों (जैसे मंदिर) को सभी संप्रदायों के लिए खोलने और सामाजिक सुधार के लिए किया गया है।
विवाह अधिनियम: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 भी इन धर्मों के अनुयायियों पर लागू होता है।
सिद्धांत: हालांकि ये धर्म अपने मूल में हिंदू धर्म से अलग हो सकते हैं (वेदों को न मानना), लेकिन भारतीय कानून के तहत वे इसी वर्ग में गिने जाते हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल संवैधानिक अनुच्छेद 25 के विधिक स्पष्टीकरण पर आधारित है, न कि इन धर्मों के दार्शनिक अंतर पर।
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