एक सोच जो वास्तव में धर्म को समझती ही नहीं वह एक सवाल बार-बार करती है कि देश बड़ा या धर्म ऐसे लोगों को आचार्य अनिरुद्धआचार्य जी ने बिल्कुल सटीक जवाब दिया है
धर्म से बड़ा ना कभी कुछ था ना है और ना कभी हो सकता है धर्म सर्वोपरि है और यह धर्म ही है जो आपको राष्ट्र से प्रेम करना सीखना है आपको संविधान से प्रेम करना सीखना है आपको कानून का सम्मान करना सीखा था अन्यथा मत मजहब पंत और समुदाय यह तो सब कुछ बर्बाद करने पर तुले हुए हैं.. धर्म एक ही है सनातन धर्म और वही सबसे ऊंचा है और वही इस संपूर्ण सृष्टि को सुख शांति तथा समृद्धि प्रदान कर सकता है बाकी तो आतंक फैलाने में धर्मांतरण करने में जुटे हुए हैं।

