आखिर क्या जरूरत है हिंदू नेताओं को मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने की? क्या जरूरत है इफ्तार पार्टी में जाकर इफ्तारी उड़ाने की? ये सब केवल दिखावा है केवल वोट बैंक के चक्कर में लेकिन इस दिखाई का दुष्प्रभाव हिंदू समाज पर पड़ता है जिसके जिम्मेदार हम सब है जो ऐसे दिखावटी , वोट बन के लालची नेताओं को वोट देते है....
हमें ऐसे एक एक नेता का विरोध और बहिष्कार करना चाहिए जो राजनीत के चक्कर में बढ़ चढ़कर iftari और नमाज आदि में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है... कभी कोई मुस्लिम नेता ऐसी घटिया राजनीति करता नजर नहीं आएगा लेकिन दुष्ट, लालची हिंदू नेता बढ़चढकर अपने सेक्युलरिज्म का दिखावा करते है

