बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास नमाज पढ़ने की परमिशन देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और किसी भी जगह नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार नहीं माना जा सकता।
ऐसी खबरें देखकर कभी-कभी लगता है कि हमारे न्याय तंत्र में भी अच्छे बदलाव आने लगे हैं जिस कारण वहां से किसी के दबाव में नहीं अपितु निष्पक्ष निर्णय आ रहे है। सोचिए ये निर्णय 75+वर्षों बाद न्यायालय से आ रहा है... और शायद तब जब सार्वजनिक स्थलों पर एक मानसिकता की आतंकी हरकतें दिखाई देने लगी

