ब्राह्मणों, चश्मा छोड़ो..ब्राह्मण पत्रकार ने चश्मा पहन लिया तो JNU वाले वंचित भैया प्रताड़ित हो गए, ये माइंडसेट है इन सो कॉल्ड वंचित लोगों का । ऐसी सोच के लोगों के हाथ में आप UGC जैसा ख़ौफ़नाक थमा नहीं थमा सकते। इन्हें ब्राह्मण के चश्मा पहनने से समस्या है जबकि ख़ुद ब्राह्मण पत्रकार से अधिक अच्छे कपड़े पहने हैं
क्या हालत करते होंगे ये कैंपस में सवर्ण छात्रों की, प्रताड़ना जाति से नहीं सोच से होती है और सोच किसी की भी ख़राब हो सकती है। दुर्भाग्य के आज तक किसी सरकार ने, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कभी सवर्णों के लिए सोचा ही नहीं, आगे भविष्य में तो लगता है सवर्ण पैदा होने वाले बच्चे अपने आप पर शर्म करेंगे कि काश हम sc st या OBC अथवा मुस्लिम पैदा होते क्योंकि सवर्णों के लिए तो अब केवल कानून का भय बचा है भारत में

