बामपंथी तथा कांग्रेसी इतिहासकारो , पत्रकारों ने इस हत्##,याकां#ड की चर्चा देश में कभी नही की , JNU के उर चाटक लौं#डे , और लिंगोत्सुक कन्याये इन विषयो पर चुप्पी साध लेते है ..............
Marichjhapi में बामपंथियो हिन्दुओ के बीभत्स नरसं#हार के वह तथ्य जो कभी देश के हिन्दू समाज के संज्ञान में नहीं लाये गए ....
इतिहास की ख़ास बात यह है की ये कभी मरता नही ,कभी खत्म नही हो सकता , इसके पन्नो में वह ताकत होती है कि ये वर्तमान के किसी भी तिलिस्म की चूले हिला सकता है !
बामपंथ ...............
इस विचारधारा की सबसे ख़ास बात और सबसे आकर्षक चीज इसकी दिखावटी उदारवादी सोच होती है या फिर दशको से भारत की आम जनता को बताया जाता रहा है ...
इसी तथाकथित उदारवादी सोच के एक काले चेहरे का जिक्र ...
1970 के दौर में बांग्लादेश इस्लामी उ#त्पीडन तथा लूट#पाट बला#,त्कार झेलने के बाद से बहुत से हिन्दू भारत में आये थे ..इनमे से बहुत से हिन्दू बंगाल के मरीचजपी में आकर बस गए थे ,
31 जनवरी 1979 , कम्युनिस्ट प्रशासन वाला पश्चिम बंगाल .....
अचानक से बंगाल पुलिस ने इस इलाके को घेर लिया और पुलिस के साथ आये कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने हिन्दुओ से इस इलाके को खाली करने को कहा , इसके साथ ही पुलिस ने हिन्दुओ पर फायर खोल दिया ,और हिन्दुओ को दौड़ा दौड़ा के क़त्#ल किया गया ,जो हिन्दू नदी के रास्ते भागे उन्हें मोटरवोट की मदद से दौड़ा कर मारा गया ..............
सरस्वती पूजा की तैयारी में लगे हिन्दू बच्चो का क़त्ल किया गया , 100 से जादा हिन्दू महिलाये बला#त्कार का शिकार हुयी .................
हिन्दू पुरुषो को मारने के बाद सरस्वती की प्रतिमाये तोड़ी गयी , बताया जाता है कि इस घटना में 1600 हिन्दुओ का क़#त्ल किया ह्या जिसमे महिलाओं और बच्चो की संख्या जादा थी .........
ज्योति बासु की अगुयायी में इस बीभत्स घटना को अंजाम दिया गया था .ये वही तथाकथित उदारवादी लोग है जो भारत में रोहिंगिया मुसलमानों का समर्थन करते पाए अगये थे ..ये वही लोग है जो आज बंगलादेश , पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इस्लामी अत्याचार उत्पिदाना बला#,त्कार लूटपाट का शिकार होकर भारत में शरण लेने आये हिन्दुओ का विरोध कर रहे है .....ये वही लोग है जो बंगाल और आसाम में आज आग लगा रहे है !
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