📚 (मुख्यतः श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण, कल्कि पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, भविष्य पुराण आदि से प्रेरित)
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हिन्दू शास्त्रों में भविष्य को अनंत संभावनाओं से भरा बताया गया है, लेकिन कुछ निश्चित घटनाएँ तय हैं। जैसे ऊँचे स्थान से खड़े व्यक्ति दूर की बारिश देखकर नीचे वालों को बता सकता है, वैसे ही महर्षियों ने पुराणों में कलियुग की कई घटनाएँ वर्णित की हैं।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार अनिश्चित भविष्य के बीच एक निश्चित या तय भविष्य की रेखा चलती रहती है अर्थात भविष्य में कुछ घटनाओं का घटना तय है तो कुछ के बारे में कुछ भी नहीं कहा जाता सकता। भविष्य का निर्माण एक व्यक्ति, समूह या संगठन पर ही निर्भर नहीं है बल्कि इसमें प्राकृतिक तत्वों का भी योगदान रहता है। संभावनाएं अनंत हैं, लेकिन कुछ संभावनाओं के बारे में पुख्ता तौर पर कहा जा सकता है। जैसे ऊँचे स्थान से खड़े व्यक्ति दूर की बारिश देखकर नीचे वालों को बता सकता है, वैसे ही महर्षियों ने पुराणों में कलियुग की कई घटनाएँ वर्णित की हैं।
यहाँ हम इस बार लाए हैं हिन्दू पुराणों में वर्णित कुछ ऐसी भविष्यवाणियां जिन्हें जानकर आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे।
श्रीकृष्ण जी ने कहा था— ऐसा होगा कलियुग… भारत में पैदा होगा दुनिया का 'मुक्तिदाता'
ये भविष्यवाणियाँ हमें सतर्क करती हैं और सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लेने को प्रेरित करती हैं। अतः ये भविष्यवाणियाँ डराने के लिए नहीं, बल्कि जागृत करने, सतर्क रहने और सकारात्मक परिवर्तन के लिए हैं। आइए इन 12 भविष्यवाणियों को श्लोक सहित समझें।
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🌼 1. विवाह मात्र समझौता बन जाएगा।
श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 12) में कलियुग का वर्णन है कि विवाह सच्चे प्रेम से अधिक भौतिक लाभ और समझौतों पर टिकेगा।
श्लोक उदाहरण (प्रासंगिक भाव):
_दाम्पत्येभिरुचिहेतमायैव व्यावहारके।_
_स्त्रीत्वे पुंस्तवे च हि रितर्विप्रत्वे सूत्रमेव हि॥_
अर्थ : श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, कलियुग में विवाह सच्चे प्रेम और कर्तव्य से अधिक भौतिक सुखों और समझौतों पर टिका होगा। संबंध केवल शारीरिक इच्छाओं या लाभ के लिए होंगे। महिलाएँ बेहद कड़वा बोलने लगेंगी और उनके चरित्र में नकारात्मकता घेर चुकी होगी। उनके ऊपर न तो पिता का और न ही पति का जोर होगा। आज लिव-इन-रिलेशन, समलैंगिक विवाह, तलाक की बढ़ती दर, भ्रूण हत्या, दहेज और छल-कपट और इसी तरह की तमाम बुराइयाँ इसी की ओर इशारा करते हैं।
प्रेरणा : सच्चा प्रेम और पारिवारिक मूल्य आज भी संभव हैं, यही हमें कलियुग के इस चक्र से ऊपर उठा सकता है।
🌼 2. धन ही गुण और सम्मान का मापदंड बनेगा।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 12.2 से प्रासंगिक):
_वित्तमेव कलौ नृणां जन्माचारगुणोदय:।_
_धर्मन्यायव्यवस्थायां कारणं बलमेव हि॥_
_लिड्गमेवाक्षमख्यातावनेयोन्यापत्तिकारणम।_
_अवृत्तया न्यायदौर्बल्यं पाडिण्त्ये चापलं वच:॥_
अर्थ : कलियुग में धन ही मनुष्यों के उत्तम जन्म, सदाचार और गुणों का आधार माना जाएगा। धर्म और न्याय की व्यवस्था में केवल बल (शक्ति) ही कारण होगा। आश्रम की पहचान केवल बाहरी चिह्न (लिंग/व्यवहार) से होगी, और एक आश्रम से दूसरे में जाने का कारण भी वही होगा। जीविका के अभाव में न्याय की दुर्बलता होगी, और पंडिताई में केवल चपल (ढीठ/चिकनी-चुपड़ी) वाणी ही होगी। रिश्ते, विवाह, व्यवहार सब स्वार्थ, आकर्षण और छल पर आधारित होंगे।
प्रेरणा :सच्चा धन आत्मिक है। सद्गुण, दया और सत्य से बड़ा कोई खजाना नहीं।
🌼 3. लोग झूठ, हिंसा और भ्रष्टाचार में डूब जाएंगे।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण से):
_अनाढ्यतैवासाधुत्वे साधुत्वे दम्भ एव तु ।_
_स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥_
अर्थ : कलियुग में धन का अभाव ही व्यक्ति को असाधु (अधर्मी, नीच या बुरा) मानने का एकमात्र कारण होगा, और दम्भ (दिखावा, पाखंड) ही साधुत्व (सद्गुण, साधुता या अच्छाई) माना जाएगा। विवाह केवल मौखिक स्वीकार (शब्दों से "हाँ" कहना या सहमति) से हो जाएगा, और स्नान (शुद्धि) केवल सज-धजना (प्रसाधन, मेकअप, अच्छे कपड़े पहनना, सज्जा करना) ही समझा जाएगा।
प्रेरणा : अहिंसा, करुणा और गौ-सेवा से धरती बच सकती है।
🌼 4. लोगों की आयु घट जाएगी।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 12.2 से):
_क्षुद्रदृष्टयो व्याधिभिश्चैव सन्तप्स्यन्ते च चिन्तया ।_
_त्रिंशद्विंशतिवर्षाणि परमायु: कलौ नृणाम् ॥_
*अर्थ :* कलियुग में लोग क्षुद्रदृष्टि (नीच/तुच्छ सोच वाले, छोटी-छोटी बातों में उलझने वाले) हो जाएंगे तथा रोगों से और चिन्ता (मन की व्याकुलता/दुःख) से बहुत अधिक सन्तप्त (जलते-तपते) रहेंगे। कलियुग में मनुष्यों की परम आयु (अधिकतम आयु) 30 वर्ष की होगी।
*प्रेरणा :* स्वस्थ जीवनशैली और सदाचार से आयु और स्वास्थ्य संरक्षित रखें।
🌼 5. धरती का मौसम बदल जाएगा।
श्लोक (प्रासंगिक):
_अनावृष्टया व्याधिभिश्चैव सन्तप्स्यन्ते च चिन्तया ।_ _शीतवीतीवप्रावृड्हिमैरन्योन्यत: प्रजा:॥_
*अर्थ :* कलियुग में प्रजा सूखे, बीमारियों और चिंता से बहुत कष्ट उठाएगी। कभी अत्यधिक ठंड, तेज हवाएं, भारी बारिश और ओले/पाला के कारण लोग एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते हुए (या परस्पर कष्ट देते हुए) जीवन व्यतीत करेंगे।
*प्रेरणा :* पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य है।
🌼 6. वैदिक धर्म का पतन होगा।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण से):
_ततश्चनुदिनं धर्म: सत्यं शौचं क्षमा दया।_
_कालेन बलिना राजन् नड्क्षय्यायुर्बलं स्मृति:॥_
*अर्थ :* कलियुग में समय इतना ज़ोरदार है कि रोज़-रोज़ अच्छाई, सच, साफ़ रहना, माफ़ करना, दया, लंबी उम्र, ताकत और अच्छी याददाश्त—ये सब कमज़ोर पड़ते और खत्म होते जाएँगे। धरती पर रहने वाला कोई व्यक्ति किसी भी तरह से वैदिक और धार्मिक कार्यों में रुचि नहीं लेगा, वह एक स्वच्छंद जीवन व्यतीत करेगा। कलयुग में लोग सिर्फ एक धागा पहनकर अपने को ब्राह्मण होने का दावा करेंगे।
*प्रेरणा :* वेदों और संस्कारों को जीवित रखें।
🌼 7. कलियुग का खौफनाक सच।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 12:6 से):
_दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम् ।_
_उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि ॥_
_दाक्ष्यं कुटुम्बभरणं यशोऽर्थे धर्मसेवनम् ।_
_एवं प्रजाभिर्दुर्भिराकीर्णो क्षितिमण्डलः ॥_
*अर्थ :* कलियुग में लोग दूर के तालाब, नदी या जलाशय को ही तीर्थ मानेंगे, लेकिन पास में रहने वाले माता-पिता या निकट के तीर्थों की उपेक्षा करेंगे। धर्म का पालन सिर्फ नाम कमाने या प्रसिद्धि के लिए किया जाएगा। जीवन का मुख्य काम सिर्फ पेट भरना और अपना स्वार्थ साधना होगा।
🌼 8. कलियुग का क्रूर समय।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 12:20 से):
_गावोऽपि बकर्याकृतयोऽल्पक्षीराः भविष्यन्ति ।_
_अन्नं नोत्पत्स्यते, मनुष्याः मत्स्य-मांसादिभिः जीविष्यन्ति, अजाविकादुग्धं पिबन्ति ।_
_गावः प्रायेण न दृश्यन्ते वा अल्पदुग्धा भविष्यन्ति ।_
*अर्थ :* कलियुग के आखिरी समय में गायें बकरियों जितनी छोटी-छोटी हो जाएँगी और बहुत कम दूध देंगी (या दूध देना बंद कर देंगी)। अनाज बिल्कुल नहीं उगेगा। लोग मछली-मांस खाकर गुजारा करेंगे और भेड़-बकरियों का दूध पीएँगे। गायें या तो दिखना बंद हो जाएँगी या बहुत कम दूध वाली रह जाएँगी।
🌼 9. गंगा और प्रमुख तीर्थ लुप्त हो जाएंगे।
श्लोक (ब्रह्मवैवर्त पुराण 6:89 से):
_कलौ पञ्चसहस्रे च गते वर्षे च मोक्षणम् ।_
_युष्माकं सरितां भूयो मद्गृहे चागमिष्यथ ॥_
*अर्थ :* कलियुग में गंगा माता (और सरस्वती, पद्मा आदि प्रमुख तीर्थ/नदियाँ) लगभग 5000 वर्ष तक धरती पर रहेंगी। इस दौरान उनके स्नान/दर्शन से पाप नष्ट होंगे। लेकिन कलियुग के 5000 वर्ष पूरे होने पर (जो अभी लगभग हो चुके हैं, क्योंकि कलियुग शुरू हुए ~5126 वर्ष हो गए हैं), पाप बहुत बढ़ने से वे नदी रूप से लुप्त हो जाएँगी या स्वर्ग/वैकुण्ठ लौट जाएँगी। प्रमुख तीर्थ (काशी, प्रयाग आदि) भी अपना महत्व खो देंगे, क्योंकि पवित्रता घट जाएगी। केवल नाम-कीर्तन से मुक्ति बचेगी।
🌼 10. कल्कि अवतार का जन्म होगा।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 2:18 से):
_सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः ।_
_भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति ॥_
अर्थ : ममकलियुग के अंत में भगवान विष्णु कल्कि रूप में संभल ग्राम (उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के पास स्थित संभल) में विष्णुयश नामक एक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर पुत्र रूप में जन्म लेंगे। वे बुराइयों का नाश कर सतयुग स्थापित करेंगे।
प्रेरणा : अच्छाई का मार्ग अपनाएँ, अवतार की प्रतीक्षा में स्वयं सुधारें।
🌼 11. स्वर्ण युग की शुरुआत होगी।
श्लोक (श्रीमद्भागवत पुराण 2:23):
_यदावतीर्णो भगवान् कल्किर्धर्मपतिर्हरिः ।_
_कृतं भविष्यति तदा प्रजासूतिश्च सात्त्विकी ॥_
अर्थ : भगवान कल्कि के अवतार लेते ही कलियुग खत्म हो जाएगा, और स्वर्ण युग (सतयुग) शुरू हो जाएगा। लोग स्वाभाविक रूप से सच्चे, शुद्ध और अच्छे बन जाएँगे।
प्रेरणा :परिवर्तन का समय आ रहा है अर्थात सकारात्मक रहें।
🌼 12. कट्टरपंथी धाराओं का अंत होगा।
भविष्य पुराण (प्रतिसर्ग पर्व) में कुछ धर्मों के उदय और उनके अंत का वर्णन है।
_लिंगच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः ।_
_उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम ॥२५॥_
_विना कौलं च पशवस्तेषां भक्ष्या मता मम ।_
_मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति ॥२६॥_
_तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषकाः ।_
_इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृतः ॥२७॥_
अर्थ : कलियुग में मेरे अनुयायी खतना करवाएंगे, शिखा नहीं रखेंगे, दाढ़ी रखेंगे, ऊँची आवाज़ में बोलेंगे/आजान देंगे, सब कुछ खाएंगे। वे बिना किसी हिंदू रिवाज के जानवर खाएंगे। उनका संस्कार मुसल (मूसल) से होगा, जैसे हिंदुओं में कुश से होता है। इसलिए वे लोग धर्म को बिगाड़ने वाले होंगे, और यह पैशाच (राक्षसी) धर्म मैंने बनाया है।
प्रेरणा : सत्य और अहिंसा पर आधारित जीवन जिएँ।
महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है, लेकिन यह किसी जलप्रलय से नहीं बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा। महाभारत के वन पर्व में उल्लेख मिलता है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातों समुद्र और नदियां सूख जाएंगी। संवर्तक नाम की अग्रि धरती को पाताल तक भस्म कर देगी। वर्षा पूरी तरह बंद हो जाएगी। सबकुछ जल जाएगा, इसके बाद फिर 12 वर्षों तक लगातार बारिश होगी जिससे सारी धरती जलमग्न हो जाएगी।
ये भविष्यवाणियाँ डराने नहीं, बल्कि जागृत करने के लिए हैं। कलियुग में भी नाम-कीर्तन से मुक्ति संभव है।
विभिन्न पुराणों से संकलित।
🔏 लेखक : पंकज सनातनी
अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏
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