ईरान की सबसे बड़ी अल रसूल मस्जिद को ईरान के मुसलमानो ने जला दिया उनका कहना है इस्लाम की शिक्षा ने उनके जीवन को बर्बाद कर दिया उनका कहना है महिलाओं को बुर्के में लपेटकर 1979 के बाद उनके जीवन बर्बाद कर दिए। और पुरुषों नौजवानों को कला कौशल विज्ञान के क्षेत्र से रोक कर , उन्हें मुल्ले मौलवी हलाला हर तरह के बेजुबान काटकर खाने और आतंक खून खराबे में लगा दिया , जमीन से जन्नत आसमान तक केवल सेक्स सेक्स सेक्स ही दिमाग में भर दिया।
इसलिए इस्लामी शिक्षा अब हमको नहीं चाहिए इसीलिए ईरान के महिला पुरुष बच्चे नौजवान सब ईरान में इस्लाम से दूर होना चाहते हैं और इस्लाम में जाने से पहले के अपने मूल संस्कृती में वापस लौटना चाहते हैं। भारत के कँवर्टेडो को भी सोचना चाहिए कि उनका मूल भारत है भारत की सभ्यता संस्कृति है 5,10 पीढ़ी पहले इस्लामी आक्रमण उन्माद में अपनी बहन बेटियों को बचाने के लिए #धर्म बदलने की मजबूरी होगी ठीक है लेकिन ईरान की तरह उन्हें अपने मूल जड़ों की ओर लौटना चाहिए ना की अरबियों से ज्यादा कट्टर होकर कन्वर्टेड होकर भी चाय से ज्यादा केतली गरम बने रहना चाहिए।
ईरान के कन्वर्टेड मुसलमानों ने दुनिया के कन्वर्टेड मुसलमानों को अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक मौका दिया है। ईरान में बदलाव अब कोई नहीं रोक सकता क्योंकि उन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय ले लिया है भारत के कन्वर्टेड भी विचार करें उन्होंने अरबी नकल करने में अपनी क्या हालत कर ली।

