हमें व्यक्तिगत रूप से इससे कोई समस्या नहीं है, दोनों आपस में एक-दूसरे को जो भी समझते हों, वह उनका विषय है लेकिन इन्हें देखकर मुझे दिल्ली वाला केस याद आ जाता है...जहाँ एक हिंदू लड़की नेहा एक मुस्लिम लड़के तौकीर को अपना मुँह बोला भाई मानती थी, राखी भी बाँधती थी.... भाई मानकर ही उसके साथ व्यवहार करती थी इसके बावजूद वही मुस्लिम लड़का तौकीर अपनी मुँह बोली बहन नेहा पर निकाह के लिए दबाव डालने लगा।
जब नेहा ने साफ कहा कि"मैं तुम्हें भाई मानती हूँ, राखी भी बाँधती हूँ, निकाह का सवाल ही नहीं उठता" तो इसी गुस्से में तौकीर ने नेहा को छत से धक्का दे दिया, जिससे उसकी जान चली गई...जब मजहब में चाचा की बेटी को बहन नहीं माना जाता, तो फिर दूसरे धर्म की लड़की को बहन मान सकते है इसकी क्या गारंटी है ??
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