ये बुरखेवाली मोहतरमा कह रही है कि एक बार जहां मस्जिद ब गई वहां फिर वो कयामत तक रहती है, लेकिन इस मक्कार ने ये नहीं बताया कि इनके ही मजहब के अनुशार किसी और धर्म स्थल पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती , यदि ऐसा किया जाता है तो वहां की गई इबादत इनके अल्लाह स्वीकार नहीं करते... ये मक्कार अपने मजहब और अल्लाह के ही वफादार नहीं तो इनसे कैसे कोई भाईचारा निभाने की सोच भी सकता है
माना कि हमें लंबे संघर्षों के बाद राम मंदिर मिल गया लेकिन संघर्ष खत्म हो गया ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि जहां आदि मानसिकता अब भी उसे मंदिर पर अपनी निगाहें जमी बैठी है और जैसे ही इन्हें मौका मिलेगा यह अपना असली रंग फिर दिखाएंगे इसलिए हर सनातनी को अपने धर्म की अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए केवल सरकार प्रशासन आदि पर निर्भर नहीं होना चाहिए

