अब तक ऐसा माहौल बनाया जाता रहा कि यदि यह मानसिकता पढ़ लिख लेगी तो आतंक नहीं फैलाएगी लेकिन यह पूरी तरह उल्टी बात निकली। पढ़े लिखे जेहादी अनपढ़ जेहादियों से कहीं अधिक खतरनाक सिद्ध हो रहे हैं.... डॉक्टर के बाद अब वकीलों का नेटवर्क आया सामने
जब तक इस मानसिकता को कट्टरपंथी और आतंकी बनाने वाले मजहबी अड्डे खत्म नहीं होंगे तब तक इन्हें जितना पढ़ालो यह फैलाएंगे आतंक ही और दुनिया के लिए विनाशकारी सिद्ध होंगे... आतंक को खत्म करना है तो मदरसों का समूल नाश आवश्यक है

