यह चाहता तो बिना टोपी के बिना दाढ़ी के छठ पूजा सामग्री बेच सकता था लेकिन फिर भी आत्मविश्वास के साथ टोपी और दाढ़ी के साथ बेच रहा है क्योंकि इसे मालूम है हिंदू धर्मनिरपेक्षता के नशे में होते हैं । हिंदुओं के लिए पूजा की पवित्रता से अधिक सेक्युलरिज्म और भाईचारे का दिखावा मायना रखता है
अब आप कल्पना करिए की कोई हिंदू टीका लगाकर भगवा कपड़े पहनकर अपने दुकान में भगवान जी की तस्वीर रखकर मिस्बाह वाली माला बेचे तो क्या कोई मुस्लिम उससे खरीदेगा?? बिल्कुल नहीं खरीदेगा क्योंकि उनका लक्ष्य फिक्स है वह एकदम फोकस्ड होते हैं वह कंफ्यूज नहीं होते