ये मुस्लिम महिला अपने समाज के सबसे निचले पायदान की है। लखनऊ से आसाम अपने संयुक्त परिवार कुल 26 सदस्य के साथ जाकर वोट डालने के लिय बात बता रही है। दूरी 1,115किलोमीटर से भी अधिक की है, एक महीने बाद लौटेगी, चुनाव की तारीख भी मालूम है। एक महीने सभी लोगो के काम न करने पे आर्थिक नुकसान होगा तो हो जाए पर वोट जरूर देने जाएंगे
अनपढ़ होने पे भी पॉलिटिकल awareness कमाल की है, वोट किसे देना है ये concept एकदम clear है,...NO CONFUSION...चाहे कितना भी फ्री राशन खाया हो,और घर मकान शौचालय आयुष्मान भारत लाभ उठाया हो...पर वोट किधर किसे देना है,उधर ही देंगे..
कांग्रेस को वोट देंगे,बीजेपी को नहीं.. चाहे जो कर दो हमारे लिय(मुस्लिमो के हितों के लिय)
क्या कोई हिंदू दिहाड़ी जी दूसरे शहरों में जाकर कमाते है,सब छोडछाड़ के, कामधंधे,रुपए पैसों का नुकसान करके वोट डालने अपने गांव के बूथ पे जाएगा..?
तुलना कर लीजिए
क्यों 20% वाले 80% वालों पे भारी है
ये संदेश वीडियो के साथ वायरल कर सके तो कीजिए
शायद कुछ आरामतलब सुविधाभोगि हिंदुओ को शर्म आ जाए और वोट के लिय बूथ तक जाए🙏🏻🙏🏻

