जय श्री राम।।
राम जी के प्रति भरत जी की भाव भक्ति देखकर हनुमानजी मन में बहुत आनंदित हुए।
हनुमान जी के नेत्रों से जल बरसने लगा।
अपने मन में सुख मान कर कानो के लिए मानो अमृत के समान वाणी में हनुमानजी बोले।
*रिपु रण जीति सुजस सुर गावत।*
*सीता सहित अनुज प्रभु आवत।।*
शत्रु पर विजय प्राप्त करके सीता जी और भाई लक्ष्मण जी सहित प्रभु आ रहे हैं।
संत कहते हैं ।
कि संदेश सुनाने की शैली कोई हनुमान जी से सीखे।
कितना बढ़िया संदेश सुनाया।
एक ही वाक्य में सारी बातें कह डाली ।
और बातें भी बड़े क्रम से कहीं। सीता जी का हरण पहले हुआ था तो सीता जी का नाम पहले लिया लक्ष्मण जी को शक्ति बाद में लगी थी। तो लक्ष्मण जी का नाम बाद में लिया।
हनुमान जी जानते हैं।
कि यदि मैं केवल इतना ही कहूंगा कि राम जी आ रहे हैं।
तो फिर एक नया प्रश्न बनेगा ?
लोग पूछेंगे ।
आ तो रहे हैं ,पर शत्रु पर विजय प्राप्त करके आ रहे हैं या बिना उसके ही आ रहे हैं?
इसलिए पहले से ही कह दिया कि शत्रु पर विजय प्राप्त करके आ रहे हैं।
हनुमान जी जानते हैं अयोध्या में सब जानते हैं कि सीता जी का हरण हुआ था।
तो प्रश्न करता यहां यह भी प्रश्न करेंगे? की सीता जी को लेकर आ रहे हैं।
फिर कहना पड़ेगा हां सीता जी को लेकर ही आ रहे हैं।
फिर तीसरा प्रश्न बनता था। लक्ष्मण जी को शक्तिवाण लगा था ।
तो साथ में लक्ष्मण जी है या नहीं?
फिर उत्तर देना पड़ेगा।
हां लक्ष्मण जी भी साथ में आ रहें हैं ।
हनुमान जी ने किसी को कोई प्रश्न करने का अवसर ही नहीं दिया। एक ही वाक्य में सारा समाचार सुना दिया।
संत कहते हैं यदि कोई संवाद दाता हो तो हनुमान जी जैसा होना चाहिए।
हनुमान जी द्वारा यह सुंदर संदेश सुनकर भरत जी ने पूछा?
भाई इतना सुखद समाचार सुनाने वाले आप कौन हो।?
और कहां से आए हो?
*को तुम्ह तात कहां ते आए।*
*मोहि परम प्रिय बचन सुनाए।।*
हनुमान जी ने उत्तर दिया ।
मैं पवन का पुत्र हूं ।
जाति का वानर हूं ,।
और मेरा नाम हनुमान है।
*मारुतसुत मैं कपि हनुमाना।।*
हनुमान जी ने यहां पूरा परिचय देने के साथ साथ अपना काम भी बता दिया।
*दीनबंधु रघुपति कर किंकर।।*
*मैं रामजी का सेवक हूं।*
संत कहते हैं हनुमान जी के चरित्र को हमें हमारी जीवन शैली में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
आजकल कुछ लोग लंबे समय के पश्चात अपने किसी परिचित से मिलते हैं तो प्रश्न करते हैं ।पहचाना मुझे।
सामने वाले को धर्म संकट में डाल देते है।
यदि सामने वाला यह कह दे की भाई मैं तुम्हें नहीं पहचान पा रहा हूं।
तो उस पर और अधिक प्रभाव जमाते हुए कहते हैं।
याद करो हम तो पहले भी मिल चुकें हैं।
अब यदि सामने वाला किसी कारण से उसे नहीं भी पहचान पा रहा है ,तो उसके सामने इस तरह का झंझट पैदा करने की क्या आवश्यकता है।
जबकि होना तो यही चाहिए जब हम किसी से मिलें तो अपना पूरा परिचय दें ।
सामने वाले को क्यों उलझन में डालें।
मिलने को तो हनुमानजी भी भरत जी से एक बार पहले मिल चुके थे।
किन्तु हनुमानजी ने यहां यह नहीं कहा पहचाना मुझे।
सीधे सीधे अपना पूरा परिचय दिया।
हनुमान जी ने जैसे ही कहा कि मैं कृपा निधान श्री राम जी का सेवक हूं।
तो भरत जी ने हनुमान जी को हृदय से लगा लिया ।
और कहा भाई रामजी के सेवक का स्थान मेरे चरणों में नहीं मेरे हृदय में हैं।
नेत्रों से प्रेम आश्रु बहने लगे ।भरत जी ने जब हनुमान जी को अपने हृदय से लगाए तब पूछा। हनुमान क्या तुम सचमुच हनुमान हो?
हनुमान जी ने कहा हां भरत भैया मैं हनुमान ही हूं ।
मैं तो पहले भी आपसे मिला हूं। भरत जी ने कहा हनुमान जब मैं अपने नेत्रों से तुम्हें देखता हूं तो तुम हनुमान दिखाई देते हो।
किंतु जब मैं तुम्हें अपने हृदय से लगाता हूं तो मुझे लग रहा है कि मैं राम जी से ही मिल रहा हूं।
जब तुम मेरे हृदय से लगते हो तो मुझे यह लगता है कि तुम राम ही हो
और स्वामी तुलसीदास जी कहते हैं भरत जी को भला ऐसा क्यों नहीं लगेगा।
क्योंकि हनुमान जी के हृदय में राम जी विराजमान है ।
*जासु हृदय आगार बसहु राम सर चाप धर।।*
भरत जी को राम जी से मिलने की जितनी व्याकुलता है।
उतनी ही व्याकुलता श्री राम जी को भी भरत जी से मिलने की है।
राम जी ने मन में विचार किया की पुष्पक विमान से जाकर तो बाद में मिलूंगा ।
अभी तो मैं हनुमान जी के हृदय में बैठकर ही अपने भाई भरत जी से मिल लेता हूं।
इसलिए राम जी ही हनुमान जी के साथ उनके हृदय में बैठकर आ गए थे।
भरत जी हनुमान जी से कहते हैं।
इस संदेश के सुनाने के बदले मैं तुम्हें क्या दूं ?
है हनुमान मैं तुमसे कभी उरिण नहीं हो सकता।
हनुमान जी भरत जी को प्रणाम करके श्री रघुनाथ जी के पास गए ।अब तो अवधपुरी में सब जगह चर्चा है कि भगवान बस आ ही रहे हैं।
शुभ सुकून होने लगे।
गुरुदेव को समाचार सुनाया गया माताओं ने यह समाचार सुना नगर वासियों ने समाचार सुना सब लोग प्रेमानंद में मग्न होकर फल फूल तुलसी दल थालियों में भरकर सुंदर गीत गाते हुए स्वागत के लिए तैयार हैं।
जय श्री राम।।🙏🙏🚩

