पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने मर्यादा तोड़ी, अब भूपेश बघेल उनके बयान का बचाव कर रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर अपमानजनक टिप्पणी करना ही कांग्रेस के संस्कार हैं?
सवाल साफ हैं:
• अपमानजनक भाषा को बोलने का तरीका बताकर बचाना कैसी राजनीति है?
• मोदी जी के दिवंगत माता-पिता के अपमान का बचाव ही कांग्रेस की मर्यादा है?
• क्या गांधी-नेहरू परिवार की चाटुकारिता में अब हर विवादित बयान का समर्थन जरूरी है?
राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन दिवंगत माता-पिता के सम्मान को अपनी घटिया राजनीति का हथियार मत बनाइए। देश सब देख रहा है। 140 करोड़ भारतीय अपने बुजुर्गों का अपमान करने वालों को कभी माफ़ नहीं करेंगे! वैसे भगेल उसी पिता की संतान हैं जो समय समय पर सनातन के विरोद्ध जहर उगलते रहे..

