दीनदयाल पार्क बीजेपी मुख्यालय के ठीक सामने है मगर उसके लिए ना तो ABVP के बच्चे बुलाये गए ना ही बीजेपी कार्यकर्ता।ना इवेंट बुकिंग थी,सीधे कॉलेजो और कोचिंग संस्थानों से बच्चे बुलाये गए और जो भीड़ थी वो देखने योग्य थी।थाली बजाना,दिये जलाना अब भजन क्लबिंग ये सब कोई सरकस नहीं है बल्कि टूल है ये जानने का कि देश का मूड क्या है।रविन्द्र जैन के भजन सुनने वाले हम लोगो को लगता है कि नई पीढ़ी इसमें क्या रूचि रखती होंगी मगर उल्टा है। सिर्फ भजन की एक अलग इंडस्ट्री बन चुकी है।
21 वी सदी मे जन्मा युवा 20 वालो से ज्यादा धार्मिक है।ये भजन क्लबिंग सिर्फ एक टेस्ट या असेसमेन्ट है ये परखने का कि रुचिका सिंह उदाहरण नहीं अपवाद है,युवा आज भी समर्पित है अपने देश,अपने धर्म और अपने संस्कारो को।
जिस समय विपक्ष शॉर्टकट तलाश रहा है उस समय एक नए राजनीतिक प्रयोग को हम देख पा रहे है जो सभी की समझ के परे है।इसलिए सोशल मीडिया पर जो मर्जी ट्रेंड करा लो,आप पेरासिटामोल खाकर नरेंद्र मोदी को नहीं हरा सकते।
#एक_अनुभव_एक_विचार
अवधेश प्रताप सिंह कानपुर उत्तर प्रदेश,9451221253

