जैसे-जैसे जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों के खिलाफ कार्रवाई तेज़ हो रही है, बेंगलुरु उन परिवारों के लिए एक नई जगह के तौर पर उभर रहा है जिन्हें वहां से हटाया गया है। एक मुस्लिम व्यक्ति, डॉ. हाशिम रिफ़ाई का कहना है कि 5 रोहिंग्या परिवार पहले ही आ चुके हैं, 50 और परिवारों के आने की उम्मीद है, और वह 100 परिवारों को पनाह देने के लिए ज़मीन की तलाश कर रहे हैं।
ये एक प्रकार की नौटंकी है जहां एक राज्य से घुसपैठियों को भगाया जा रहा तो दूसरे में बसाया जा रहा है। आखिर ये क्या चल रहा है भारत में ? क्यों इन रोहिंग्या घुसपैठियों का साथ दे रहे लोगों पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट को कार्यवाही नहीं करनी चाहिए..?
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