हाहा। "PM मोदी की शिक्षा" पर लेक्चर देने वाली यह लड़की कोई मासूम NEET एस्पिरेंट नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल प्रोटेस्टर है ।तीन साल पहले, जब वह सिर्फ़ 12 साल की थी, तब वह भीम आर्मी की रैली में "मोदी को 2024 में देख लेंगे" और "जब वह जाएंगे तो हम उनका झोला चेक करेंगे" जैसे नारे लगा रही थी ।तब से वह बस कहने पर रोती आ रही है। अब वह जंतर-मंतर पर कॉकरोच प्रोटेस्ट तक पहुँच गई है।
ये संघर्ष करने वाले छात्र नहीं हैं, बल्कि सरकार बदलने का काम करने वाले प्रोफेशनल लोग हैं। ये दिहाड़ी मज़दूरों से भी ज़्यादा गरीब हैं, लेकिन इन्हें अपनी कमाई के लिए बस दिन में पाँच नारे लगाने होते हैं।असली एस्पिरेंट्स पढ़ाई करते हैं। ये लोग विरोध-प्रदर्शन करके अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं।
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