हम इसमें कुछ गलत नहीं समझते है आप अगर क्रिश्चियन है तो जाहिर सी बात है कि आपकी श्रद्धा ईसा मसीह में होगी और व्यक्ति के अंदर से आप उसका धर्म नहीं निकाल सकते , लेकिन आप कल्पना करिए अगर कोई हिंदू मुख्यमंत्री भगवान श्री राम का पोर्ट्रेट लेकर निकले तब इस देश में धर्मनिरपेक्षता कैसे खतरे में आ जाएगी मीडिया में डिबेट होंगे कि अल्पसंख्यक इससे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं न जाने क्या-क्या दलीलें दी जाएगी
हमें समझ नहीं आत कि भारत में धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा क्या है? काश हिंदू नेता भी अपने धर्म के प्रति समर्पित होते, अपने धर्म को प्राथमिकता देते अपने व्यक्तिगत स्तर पर उसका प्रचार प्रसार करते। आपको नहीं लगता जोसेफ विजय के आने के बाद अब तमिलनाडु में ईसाइयत का प्रचार प्रसार और तेजी से हुआ, ईसाई मिशनरियां एक्टिवेट जो जाएंगी....
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