उत्तराखंड की शुद्धता और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध कामधेनु बद्री गाय का घी अब अंतरराष्ट्रीय पहचान पा चुका है। उत्तराखंड डेयरी फेडरेशन को बद्री गाय के देसी घी का GI टैग मिल गया है, जिससे इस उत्पाद की विश्वसनीयता और बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी है।
GI टैग मिलने के बाद अब राज्य में बद्री नस्ल के संरक्षण और घी उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
A2 प्रोटीन से भरपूर दूध
उत्तराखंड की बद्री गाय एक पंजीकृत, देसी और अत्यंत पौष्टिक नस्ल है।
इसके दूध में पाया जाने वाला A2 प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
यह गाय हिमालयी जड़ी-बूटियां और झाड़ियां चरती है, जिससे इसका दूध व घी औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
बद्री गाय को कामधेनु गाय का दर्जा मिला हुआ है और यह उत्तराखंड की पहली पंजीकृत देसी नस्ल है।
2019 की गणना के अनुसार, राज्य में बद्री गायों की संख्या लगभग 9.88 लाख है। सरकार इस नस्ल के संरक्षण और बढ़ोतरी के लिए कई योजनाएं चला रही है।
GI टैग मिलने से बद्री घी का बढ़ा बाजार
GI टैग के बाद उत्तराखंड डेयरी फेडरेशन अब बड़े स्तर पर बद्री घी की मार्केटिंग, पशुपालकों को जोड़ने, और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। बाजार में बद्री घी की कीमत लगभग ₹2500 प्रति किलो है, और इसकी मांग देश-विदेश दोनों में लगातार बढ़ रही है।
बद्री गाय के फायदे: क्यों बढ़ी मांग?
1. उच्च औषधीय गुण
हिमालयी जड़ी-बूटियों के सेवन के कारण दूध व घी बेहद पौष्टिक।
2. A2 प्रोटीन से भरपूर
A2 दूध पाचन के लिए आसान और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी।
3. मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता
बद्री गाय प्राकृतिक रूप से मजबूत और कम बीमार होती है।
4. देसी नस्ल का संरक्षण
GI टैग से देसी नस्लों को संरक्षण और संवर्धन बढ़ेगा।

