पहले इस पोष्ट को बिलकुल ठंढे दिमाग से पढ़ें और फिर इस पर बड़ी गंभीरता से विचार करें,,,,,
दोस्तों अगर सरकारी नौकरी करने वाला कोई मुस्लिम व्यक्ति का सेवानिवृत्त(retirement) हो जाता है और उस समय उसकी 4 बीबियां हैं तो उन्हे पेंशन किस प्रकार से दी जाती है,,,,,
अब पूरी प्रक्रिया समझिए पहले तो नामांकनों को देखा जाएगा और फिर उसके आधार पर यह निश्चित किया जाएगा की पेंशन का कितना भाग किसको देना है,,,,,,
लेकिन यदि कोई नामांकन पहले से होगा तब और यदि कोई नामांकन नहीं है तो पेंशन को चारों के बीच बराबर बराबर मतलब सम्पूर्ण पेंशन राशि का 25-25% बांट दिया जाता है,,,,,
और यदि इन चार पत्नियों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है,,,, तो अन्य बची तीन पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का तीन भाग करके प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,
और यदि तीन मे से एक और पत्नी की मृत्यु हो जाती है,,,,, तो अन्य बची दो पत्नियों को उस सम्पूर्ण पेंशन राशि का 50-50% प्रत्येक पत्नी को दे दिया जाएगा,,,,,
और यदि बची दो पत्नियों मे से किसी और एक की मृत्यु हो जाती है तो पेंशन की सम्पूर्ण राशि बची आखिरी पत्नी को तब तक दी जाएगी जब तक वो जीवित रहेगी,,,,,
अब आइए इस विषय पर थोड़ा शोध करते है,,,,
अगर मान लीजिए उस मुस्लिम की पहली पत्नी 60 साल की है दूसरी पत्नी 50 साल की और तीसरी पत्नी 40 साल की तथा चौथी पत्नी 30 साल की है,,,,,,
और सभी चारों बीबियों ने करीब 70-70 साल का जीवन जिया,,,,
तो कहने का मतलब पहली पत्नी शौहर के इंतकाल के वक्त यदि 60 साल की थी, तो दूसरी 50 साल की थी और तीसरी 40 साल की तथा चौथी 30 साल की थी,,,,,,
तो जो पत्नी 60साल की थी उसने 10 साल, जो पत्नी 50 साल की थी उसने 20 साल, जो पत्नी 40 साल की थी उसने 30 साल और जो पत्नी 30 साल की थी उसने 40 साल लगातार सरकार से पेंशन लिया,,,,,,,
अब इसको टोटल कर लेते है,,,
10 + 20 + 30 + 40 =100,,
अब अगर ये आंकड़ा आपके समझ मे आ गया हो तो आप खुद समझ गये होगे की एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार की तरफ से लगातार 100 साल तक पेंशन मिलती है,,,,,,,
जबकि इनकी तुलना में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की पत्नी को सरकार की तरफ से ज्यादा से ज्यादा 10 या 20 साल ही पेंशन मिलती है,,,,,
और इसका सीधा सा अर्थ ये है की चौथी पत्नी को आजीवन मुफ्त पेंशन दिलाने के लिए सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले एक नई मु*स्लिम लड़की से शादी करता है,,,,
और जब मियां की मृत्यु हो जाती है तो बड़े ही गुप्त तरीके से वो नई वाली मुस्लिम महिला अपने ही पति की पहली पत्नी से पैदा हुए बड़े लड़के के साथ निकाह कर लेती है,,,,,
और अब इसका भी सर्वे करना बहुत जरूरी है,, ऐसे ही पता नही कितने मुसलमान शरीयत का फायदा उठाकर 55 साल की उम्र मे शादी कर लेते हैं,,,
इसीलिए कॉमन सिविल कोड, की सख्त जरूरत देश मे क्यों है,,,यह अब समझ मे आएगा,,,,,
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