अभी अचानक देश भर में, विशेषतः खानग्रेस-शासित राज्यों में, वक्फ बोर्ड की ओर से हज़ारों एकड़ कृषिभूमि, मन्दिर, अस्पताल, पुरातात्विक महत्त्व के स्थान, इतना ही नहीं, संसद भवन और हवाई अड्डों पर तक दावें क्यों प्रस्तुत किये जा रहे ..?सम्भवतः वक्फ बोर्डों के कर्ताधर्ता इस प्रकार कोई बड़ा षड्यन्त्र रचने का भ्रम पाल रहे हैं..!
अभी "वक्फ अधिनियम संशोधन" पर कार्यरत "संयुक्त संसदीय समिति" सभी राज्यों में घूम कर जिस गति से उक्त संशोधन के पक्ष-विपक्ष के तर्क एवं सुझावों को सुनती जा रही है, उससे इतना तो निश्चित है कि संसद के अगले सत्र में "वक्फ अधिनियम" के प्रस्तावित संशोधनों को पारित कर लिया जायेगा...
और इसीलिये वक्फ संपत्तियों से सम्बन्धित अधिक से अधिक वाद खड़े कर उन्हें दीर्घ काल तक न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझाये रखने की कुटिल चाल चली जा रही है..! तब मोदी-शहा की जोड़ी उस समस्या को कैसे सुलझाती है, इसे देखना बड़ा ही रोचक अनुभव होगा..!

