आज सुप्रीम कोर्ट में कोलकाता की बिटिया के सुनवाई के दौरान पूरे भारत को पता चल गया कि कोलकाता पुलिस क्यों सोशल मीडिया पर नोटिस भेज कर लोगों को डरा रही है। ताकि कोलकाता पुलिस की सच्चाई सामने ना आ सके
लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कोलकाता पुलिस का सारा कच्चा चिट्ठा खुल गया
1:-पोस्टमार्टम 24 घंटे के बाद हुआ
2:- FIR पोस्टमार्टम के बाद दर्ज किया गया
3:- क्राइम सीन को 18 घंटे के बाद सील किया गया
4:- सबूत को संरक्षित करने में जानबूझकर दो दिन लगा दिए गए ताकि सबूत नष्ट हो जाए जबकि बलात्कार के मामले में सुबोध सबसे महत्वपूर्ण होते हैं
5:- वारदात वाली जगह पर कई अहम सबूत थे लेकिन कोलकाता पुलिस ने जानबूझकर उसे जगह को सील नहीं किया ताकि लोग आए जाएं और सबूत नष्ट हो सके
6:- कोलकाता पुलिस इस मामले को खत्म कर देती अगर डॉक्टर और जनता विरोध पर नहीं उतरे होते
और कपिल सिब्बल को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जो बोल रहे हैं कृपया सोच समझ कर बोलिए आपके पास ना कोई तथ्य है ना कोई जानकारी है
आप बोल कुछ और रहे हैं लेकिन कागज कुछ और बोल रहे हैं
अगली बार जब आप आईये तब कोलकाता पुलिस के एक जिम्मेदार अधिकारी को लेकर आईये
12 घंटे के बाद इस मामले में अन नेचुरल डेथ की एंट्री की गई यह बहुत हैरान करने वाला मामला है और 24 घंटे के बाद हत्या लिखा गया यह क्या हो रहा है ? आपके बंगाल में क्या यह पुलिस का क्रिमिनल प्रोसीजर को फॉलो करने का तरीका है?
आपकी कोई भी सफाई स्वीकार करने के लायक नहीं है कृपया आप जिम्मेदारी से जवाब दीजिए
अपराधियों को बचाने के लिए जब भी किसी राज्य की पुलिस सत्ताधारी पक्ष की गुलाम बन जाती है तब यही होता है
आज कोलकाता पुलिस उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जान के पुलिस की तरह काम कर रही है
कोलकाता पुलिस भूल गई कि जब पाप का घड़ा भरता है तब चौराहे पर फूटता है
अब अगली सुनवाई का इंतजार है जब कोलकाता पुलिस का अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में पेश होगा तब देखते हैं वह क्या जवाब देता है
सुसुप्रीम कोर्ट के पास यह एक अवसर है जनता के मन में अपना विश्वास जगाने का ,क्योंकि लोग सुप्रीम कोर्ट को किस शब्द से संबोधित करते हैं वो बताने की आवश्यकता नहीं है

