55 साल का मौलाना, 10-10 साल की बच्चियों, जगह मस्जिद और काम "बलात्कार" । क्या यही है मजहबी मानसिकता की सच्चाई? यदि किसी मंदिर के पुजारी पर केवल झूठा आरोप भी दुनिया के किसी भी कोने में लग जाए तो सभी बुद्धिजीवी , मीडिया यहां तक कुछ कथित बुद्धिजीवी हिंदू भी पूरे हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा कर देता है, लेकिन यहां सब खामोश...
सोचिए ये तो 1 - 2 मामले खुलकर सामने आ जाते है नहीं तो कह कहां क्या क्या हो रहा होगा कोई बात नहीं सकता। ये कोई पहली ऐसी घटना नहीं है , इसके पहले भी मस्जिद , मदरसों से ऐसी घटनाओं की ख़बरें सामने आ चुकी है। लेकिन इस मानसिकता को ये सब गलत नहीं लगता न ही शर्म आती है , क्योंकि इनके मजहब में शायद ये सब जायज है....

