इस वीडियो में ये बेटी आज अपना दुख एक मीडिया वाली को सुना रही है और वास्तव में रो रही है। हम भी मानते है के ये जो कह रही है एक इसके हिसाब से सही है, लोगों ने इसके पेरेंट्स को गलत कहा उन्हें टारगेट किए ये सही तो नहीं लेकिन क्या है न फल तो कर्मों का ही होता है। कोई भी प्रतिक्रिया बिना क्रिया के कैसे हो सकती हो। आज इन्हें दूसरे लोग कूल बनते नजर आ रहेगी लेकिन जंतर मंतर पर जब ये कूल बन रही थी तब इन्हें कुछ ध्यान नहीं आया... हम बस यही समझाना चाहते है के माता पिता अपने बच्चों को उचित ज्ञान और संस्कार दें, और बच्चे अपने दिमाग का प्रयोग कर अपने जीवन को आगे बढ़ाए... मानव बनकर कक्रोज बनकर नहीं
सभी ने देखा है के इस प्रदर्शन में मोदी जी और उनकी स्वर्गीय माता जी को कितना भला बुरा कहा, लगातार कई दिनों तक कई लोगों ने कहा... सोचिए उनका दर्द कितना गहरा होगा, किस भारी मन के साथ उन्होंने इन नालायकों को माफ किया होगा... खैर मोदी माफ कर सकते है, उनके समर्थक नहीं..नहीं... कभी नहीं

